“उर्स” की परमिशन कैंसल होने पर “मुसलमानों” कि “चेतावनी” शहर में योगी और मोदी सरकार को…

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उर्स-ए-ताजुश्शरिया की परमिशन निरस्त होने के बाद उर्स स्थल को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है देश विदेशों से मुरीद दरगाह आला हजरत पहुंच रहे हैं लाखों की तादाद में भीड़ इकट्ठा होने की संभावना की वजह से उर्स-ए-ताजुश्शरिया मैनेजमेंट कमेटी के भी हाथ-पांव फूले हुए हैं जिसकी वजह से उर्स स्थल कि बदलाव की सूचना मुरीद तक नहीं पहुंच पा रही है।

दरगाह से जुड़े खास लोगों की अगर बात मानी जाए तो लगभग 84 देशों से डेलिगेशन इस उर्स में शामिल होने के लिए बरेली पहुंचने वाले हैं साथ ही साथ दरगाह के अनुमानित आंकड़े के हिसाब से 5 से 7 लाख लोग बरेली के अंदर जूट सकते हैं।

मौजूदा हालात की अगर बात करें तो दरगाह आला हजरत पर मुरीद लगातार प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं मुरीदों का कहना है कि हमें दोहरे नागरिकों के तौर पर देखा जा रहा है यही कारण है कि हमारे धार्मि’क कार्यक्रम को रद्द करने की सा’जिश रची गई है।

उर्स परमिशन कैं’सिल होने के बाद लोग योगी और मोदी सरकार पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं हिंदूवादी संगठनों के वि’रोध के बाद अचानक प्रशासन ने उर्स-ए-ताजुश्शरिया स्थल की परमिशन कैंसिल कर दी थी आपको बता दे अभी तक आला हजरत दरगह की तरफ से कोई भी उर्स स्थल में बदलाव की घोषणा नहीं की गई है बताया गया था कि असजद मियां बरेली पहुंचने के बाद उर्स स्थल के बारे में ऐलान कर सकते हैं लेकिन अभी तक कोई भी ऐलान नहीं हुआ है

दरगाह आला हजरत से लगातार शांति की अपील की जा रही है लेकिन मुरीदों का कहना है कि उर्स परंपरागत तरीके से इस्लामिया इंटर कॉलेज के ग्राउंड में ही किया जाएगा क्योंकि हमेशा से दरगाह आला हजरत के कार्यक्रम इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में होते हैं सोशल मीडिया पर भी कुछ इसी तरीके के मैसेज वायरल किए जा रहे हैं यही कारण है कि ज्यादातर मुरीद दरगाह ए आला हजरत और इस्लामिया इंटर कॉलेज की तरफ पहुंच रहे हैं

2010 में भी प्रशासन की इसी तरह की लापरवाही के कारण शहर में ब’वाल हो चुका है लेकिन इस बार प्रशासन भी पूरी सतर्कता बरते हुए हैं सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कड़े सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं जिससे हर हालत में निपटा जा सके और शहर के अंदर कानून व्यवस्था बनाई जा सके.

ताजुश्शरिया का उर्स नौ और दस जुलाई को है. 29 अप्रैल को जमात रजा-ए-मुस्तफा के उपाध्यक्ष सलमान हसन खान ने इस्लामिया मैदान पर उर्स की अनुमति के लिए प्रशासन के पास आवेदन किया था. उर्स में करीब दस लाख की भीड़ जुटने का हवाला दिया था. आवेदन पर सिटी मजिस्ट्रेट ने कोतवाली पुलिस से रिपोर्ट मांगी. चार मई को प्रभारी निरीक्षक और छह मई को सीओ प्रथम ने रिपोर्ट दी. जिसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने उर्स आयोजन की अनुमति दे दी थी।

थाना कैंट के चनेहटा गांव के रहने वाले रजत कुमार राठौर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आनलाइन शिकायत भेजी थी. जिसमें कहा कि शहर में हर साल कई तरह के धा’र्मिक जुलूस निकलते हैं. जिससे सां’प्रदायिक विवाद होते हैं. इस वजह से नई परंपरा शुरू करने की मनाही की गई है. उर्स आयोजन से शहर का जन जीवन प्रभावित होगा. ऐसे में नई परंपरा को बढऩे से रोका जाए.

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