“बकरा ईद” और “कांवड़ यात्रा” साथ आने पर योगी का “ऐलान”, इन जानवरों की “कुर्बानी” नहीं…

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने सावन के महीने में चलने वाली कांवड़ यात्रा को लकेर पूरे प्रदेश के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिये हैं,और इस यात्रा को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने को भी कहा है,कांवड़ यात्रा की तैयारी तमाम जनपदों में शुरू होचुकी हैं।

प्रदेश में एक महीने तक चलने वाली कांवड़ यात्रा 17 जुलाई से शुरू हो रही है। सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोग माहौल बि’गाड़ने की सा’जिश लगातार रच रहे हैं, इनकी मंशा को कतई कामयाब नहीं होने देना है। उन्होंने कहा कि अ’राजकता फैलाने की को’शिश करने वालों को पहले से ही चिह्नित कर प्रभावी कार्रवाई करें।

योगी आदित्यनाथ ने मंडल स्तरीय और हर ज़िले के पुलिस प्रशासन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा की व्यवस्था के बारे में सभी अधिकारी कुंभ से सीख लें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान बकरीद (Bakrid) का त्योहार भी पड़ेगा। इस साल बकरीद और कांवड़ यात्रा की अंतिम सोमवारी एक ही दिन 12 अगस्त को है। जिससे वह समय और भी ज्यादा संवेदनशील हो जाएगा। इसलिए सभी अफसर इस बात को सुनिश्चित कर लें कि कहीं पर अलग से कोई नई परंपरा न शुरू हो।

साथ ही प्रतिबंधित श्रेणी का कोई जानवर बकरीद के दौरान न क’टने पाए। सार्वजनिक क्षेत्रों पर भी जानवर नहीं का’टे जाएंगे। प्रदेश के सभी सं’वेदनशील जगहों को चिन्हित करें और वहां पर सीसीटीवी कैमरा लगवाएं। इसके अलावा रास्ते में पड़ने वाले जर्जर तार और पोलों को ठीक करा लें। उन्होंने कहा कि डीएम और एसएसपी जेलों का नियमित निरीक्षण करें। आईजी, डीआई और कमिश्नर भी जे’लों का औचक निरीक्षण करें। कप्तान प्रतिदिन एक थाने का निरीक्षण करें।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को उनके क्षेत्र में पड़ने वाले प्रमुख शिवालयों की साफ-सफाई के निर्देश दिये। साथ ही जरूरत के हिसाब से वहां बिजली, पानी मुहैया कराने की बात कही। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर खास काम करने की बात कही।

महिलाओं की सुरक्षा समेत दूसरी बुनियादी सुविधाओं को ठीक से जांचकर कमी को दूर करने के लिए कहा। सीएम ने कावड़ियों की सुरक्षा की निगरानी हेलिकॉप्टर से करने के साथ ही, उन पर पुष्पवर्षा भी कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिवालयों के पास मां’स-म’दिरा की दुकान और अ’वैध बू’चड़खाने न हों। साथ ही प्लास्टिक, थर्माकोल का प्रयोग भी नहीं होना चाहिए। मौके पर पर्याप्त मात्रा में डस्टबिन रखवाए जाएं।

 

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