राहुल गांधी के जगह मराठा नेता सुशील कुमार शिंदे बनेंगे कांग्रेस के नए अध्यक्ष

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कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के फैसले पर अडिग रहने के बाद पार्टी में नए अध्यक्ष के नामों पर मंथन का सिलसिला जारी है। ‘द संडे गार्जियन’ का दावा है कि अब इस दौड़ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गांधी परिवार के भरोसेमंद पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे सबसे आगे चल रहे हैं।

इससे पहले मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, अशोक गहलोत, जनार्दन द्विवेदी, ए के एंटनी और मुकुल वासनिक के नामों पर भी चर्चा हुई लेकिन शिंदे का नाम अब फाइनल माना जा रहा है। इस बात की भी अटकलें हैं कि शिंदे जल्द ही राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे और सबकुछ सामान्य रहा तो उनके नाम का औपचारिक एलान हो सकता है।

हालांकि, अभी ऐलान होने में देर है क्योंकि पार्टी की महासचिव और गांधी परिवार की दूसरी सदस्य प्रियंका गांधी फिलहाल विदेश में हैं। लिहाजा, माना जा रहा है कि उनके लौटने पर ही अंतिम मुहर लग सकती है। सुशील कुमार शिंदे सोनिया गांधी के भी करीबी माने जाते रहे हैं। शिंदे ने हमेशा अपनी महत्वकांक्षाओं को पार्टी के हितों के लिए दफ्न किया है। इसलिए गांधी परिवार भी उनका मुरीद है।

जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के नाम पर विलासराव देशमुख और शिंदे में टक्कर हुई तो पार्टी ने उन्हें राज्यपाल बनाकर हैदराबाद भेज दिया था। बाद में पार्टी ने उन्हें केंद्र में गृह मंत्री बनने के लिए बुला लिया। शिंदे ने कभी पार्टी के फैसले पर उंगली नहीं उठाई।

इनके अलावा वो महाराष्ट्र से हैं, जहां कांग्रेस को सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं। शिंदे एक दलित नेता भी हैं। इसलिए पार्टी एक तीर से दो निशाने साधना चाह रही है। शिंदे एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भी काफी करीब हैं। माना जा रहा है कि एनसीपी के कांग्रेस में विलय कराने के मुद्दे पर शिंदे काफी कारगर साबित हो सकते हैं।

हालांकि, एनसीपी-कांग्रेस का मर्जर एक टेढ़ी खीर है क्योंकि राहुल गांधी और शरद पवार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद पवार ने जो शर्तें कांग्रेस आलाकमान के सामने रखी थीं, उसे पूरा करना असंभव है। सूत्रों के मुताबिक पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को महाराष्ट्र कांग्रेस का अध्यक्ष समेत अगला मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने की शर्त रखी थी। इसके अलावा एनसीपी के फंड का मामला भी राह को रोड़ा बना हुआ है।

माना जाता है कि शिंदे अगर कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं तो पवार और शिंदे की जोड़ी आगामी महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। पवार और शिंदे के बीच कभी मनमुटाव नहीं रहा। कहा जाता है कि पवार ने ही शिंदे को राजनीति में लाया था, इसलिए शिंदे उनके प्रति भी निष्ठावान रहे हैं। सोलापुर जिले में 1941 में जन्में शिंदे ने कानून की डिग्री लेने के बाद 1965 में जिला अदालत में वकालत शुरू कर दी थी। बाद में वो महाराष्ट्र पुलिस में भर्ती हो गए और 1971 तक सब इंस्पेक्टर की नौकरी की। इस बीच शरद पवार शिंदे को कांग्रेस में ले आए। 50 साल बाद आज वो पार्टी के अध्यक्ष बनने की ओर हैं।

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